विद्यालय का इतिहास

श्री आस्तीक मुनि इण्टर कालेज कोरियां का इतिहास

श्री आस्तीक मुनि इण्टर कालेज कोरियां कानपुर नगर कानपुर से 53कि0मी0 एवं घाटमपुर से 13 कि0मी0 श्री आस्तीक मुनि मन्दिर के समीप स्थित है श्री आस्तीक मुनि के नाम से विद्यालय का नामकरण हुआ है। श्री आस्तीक मुनि के लिए पौराणिक प्रसिद्धि है कि जन्मेजय के द्वारा किए जा रहे सर्प यज्ञ का निवारण श्री आस्तीक मुनि के द्वारा किया गया था। इसीलिए श्री आस्तीक मुनि का नाम ग्रहण करने से सर्पभय समाप्त हो जाता है श्री आस्तीक मुनि मन्दिर के पास आने से सर्पग्रस्त व्यक्ति का विष समाप्त हो जाता है।
श्री आस्तीक मुनि इण्टर कालेज की स्थापना सन् 1950 में क्षेत्र के महापुरूष स्व0 श्री भालचन्द्र दीक्षित के द्वारा की गयी थी। ग्रामीण अंचल में स्थापित यह प्रथम प्राचीन विद्यालय है। विद्यालय स्थापना के पूर्व ग्राम कोरियां अत्यन्त ग्रामीण अंचल में स्थित, पूर्ण अविकसित आवागमन के साधनो से रहित चारों ओर से जलाशयों से घिरा हुआ एवं आवागमन के मार्गों से रहित था। विद्यालय की स्थापना के बाद जैसे जैसे विद्यालय का विकास हुआ वैसे वैसे ही ग्राम कोरियां का विकास भी प्रारम्भ हो गया।
प्रारम्भ में कक्षा 6 से 8 तक का अध्ययन अध्यापन प्रारम्भ हुआ। कुछ समय उपरान्त ही कक्षा 10 की चारों संकायों (कला, वाणिज्य, विज्ञान, कृषि) की मान्यता प्राप्त हुई एवं कक्षा 12 में प्रथम वाणिज्य संकाय एव्र शीघ्र ही विज्ञान एवं कला की भी मान्यता प्राप्त हुई।
ग्रामीण महापुरूष स्वं0 श्री भालचन्द्र दीक्षित के सतत प्रयास, अथक परिश्रम के साथ संलग्नता से त्याग, निस्प्रहता एवं निर्मीकता से विद्यालय का निरन्तर विकास होता रहा। आवागमन के मार्ग व साधन भी उपलब्ध हुए।
प्रथम विद्यालय का भवन अत्यन्त साधारण कुछ ही कमरे पक्के थे, खपरैल व टीन थी छात्रों के निवास हेतु छात्रावास का निर्माण हुआ। दूरवर्ती छात्र भी यहाँ रहकर शिक्षा ग्रहण करने लगे।
स्व0 महापुरूष की तत्परता से यहाँ के शिक्षक अत्यन्त कुशल, अध्यापन कार्य में निपुण एवं बहुज्ञ थे। यहाँ से शिक्षा प्राप्त कर छात्र अनेक राजकीय पदों में आसीन रहे तथा उस समय भी उच्च पदों में रहकर विद्यालय की ख्याति को बढ़ा रहे हैं।
स्व0 महापुरूष के त्याग का प्रभाव है कि यहां अध्ययन करने वाले अध्यापकों का भी पारिवारिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं अध्यात्मिक विकास हो रहा है यह सब महर्षि आस्तीक मुनि का प्रभाव है कि ग्राम कोरियां के ही नहीं क्षेत्र के समस्त ग्रामवासी सुख सुविधाओं युक्त आनन्द पूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहें हैं।
कुछ द्वेषी एवं विरोधी तत्व विद्यालय को हानि पहुंचाने का प्रयत्न करते रहे किन्तु श्री आस्तीक मुनि की कृपा से सभी विरोधी धीरे धीरे शांत होते रहे।
इस विद्यालय में वर्तमान समय में अध्ययन कक्ष भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला, जीव विज्ञान प्रयोगशाला, रसायन विज्ञान प्रयोगशाला, प्रधानाचार्य कक्ष लिपिक कक्ष परीक्षा कक्ष, अध्यापक कक्ष आदि सभी प्रकार के कक्षों से सम्पन्न है।
छात्रों की सुविधा के लिए नलकूप, हस्तकूप, शौचालय आदि की पूर्ण व्यवस्था है विद्यालय पूर्ण भारतीय संस्कृति का प्रतीक है इस विद्यालय में भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार विशेष रूप से किया जा रहा है भारतीय संस्कृति का उद्देश्य है-

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत।